मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट में 20 नाली पैतृक भूमि बेचने का आरोप, न्याय के लिए तहसील के चक्कर काट रहा परिवार

उत्तराखण्ड

गैरसैंण। मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट में करीब 20 नाली पैतृक भूमि को कथित तौर पर गलत तरीके से बेचे जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि जमीन की बिक्री से पहले ही तहसील प्रशासन को शिकायत दी गई थी, इसके बावजूद भूमि की रजिस्ट्री कर दी गई। पिछले कई महीनों से परिवार मामले के निस्तारण के लिए तहसील के चक्कर काट रहा है।

पीड़ित सुरेंद्र सिंह निवासी सारकोट के अनुसार, उनके पिता ने जमीन की रजिस्ट्री से पहले ही 6 अप्रैल को तहसील गैरसैंण में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि इसके बावजूद 13 मई को करीब 20 नाली पैतृक भूमि का विक्रय कर दिया गया। मामले को लेकर गढ़वाल कमिश्नर, तहसील प्रशासन और क्षेत्रीय विधायक को भी शिकायत दी गई है।

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14 खाताधारकों की सहमति नहीं लेने का आरोप

पीड़ित का दावा है कि संबंधित संयुक्त खाते में 14 खाताधारक शामिल हैं और भूमि बिक्री में सभी की सहमति नहीं ली गई। उन्होंने खाता-खतौनी और खसरा नंबरों से जुड़ी भूमि को गलत तरीके से बेचे जाने का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार

मामले में जिलाधिकारी चमोली ने जून में अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की थी। पीड़ित परिवार का कहना है कि जांच रिपोर्ट अब तक उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई है। परिवार तहसीलदार की पूर्व जांच रिपोर्ट की प्रति भी मांग रहा है।

पीड़ित ने दाखिल-खारिज प्रक्रिया के दौरान जारी इश्तेहार में नामों के गलत उल्लेख का आरोप लगाते हुए भी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि शिकायत के बावजूद उन्हें मामले की जानकारी और कार्रवाई से अवगत नहीं कराया जा रहा है।

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9 सितंबर को होगी आपत्ति पर सुनवाई

तहसीलदार हरीश पांडे ने बताया कि मामले में कानूनगो से जांच आख्या मांगी गई है। उन्होंने कहा कि 9 सितंबर को आपत्ति की सुनवाई निर्धारित है और उसके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

भूमि की खरीद-फरोख्त में भू-कानून के प्रावधानों का पालन हुआ या नहीं, इसको लेकर भी पीड़ित पक्ष ने सवाल उठाए हैं। अब आगामी सुनवाई और जांच रिपोर्ट के बाद ही मामले की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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